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सामवेद

Chapter / Prapathak 26 • Dashati / Sukta 1 • Mantra 3

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 26 • दशती / सूक्त 1 • मन्त्र 3

26.1.3

Mantra ID: 26.1.3

सुषहा सोम तानि ते पुनानाय प्रभूवसो । वर्धा समुद्रमुक्थ्यम् ॥ (३)

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सामवेद मन्त्र 26.1.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! आप धनवान, उपासना के योग्य, पवित्र, बहुत शक्तिशाली हैं और रक्षक हैं. आप समुद्र के समान इस पात्र को भर देने की कृपा कीजिए. (३)

EN English Translation

O Mon! You are rich, worthy of worship, holy, very powerful and protector. Please fill this vessel like the sea. (3)

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