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सामवेद

Chapter / Prapathak 26 • Dashati / Sukta 1 • Mantra 5

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 26 • दशती / सूक्त 1 • मन्त्र 5

26.1.5

Mantra ID: 26.1.5

त्वामिच्छवसस्पते यन्ति गिरो न संयतः ॥ (५)

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सामवेद मन्त्र 26.1.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! आप महान व बलवान हैं. सदाचारी पुरुष के पास जैसे कल्याण हेतु जाया जाता है, वैसे ही हमारी वाणीमय प्रार्थनाएं आप के पास पहुंचती हैं. (५)

EN English Translation

O Indra! You are great and strong. Just as we go to a virtuous man for welfare, our speechless prayers reach you. (5)

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