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सामवेद

Chapter / Prapathak 26 • Dashati / Sukta 1 • Mantra 7

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 26 • दशती / सूक्त 1 • मन्त्र 7

26.1.7

Mantra ID: 26.1.7

आ त्वा रथं यथोतये सुम्नाय वर्त्तयामसि । तुविकूर्मिमृतीषहमिन्द्रं शविष्ठ सत्पतिम् ॥ (७)

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सामवेद मन्त्र 26.1.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! आप अच्छे मन वाले हैं. आप सत्पति हैं. आप श्रेष्ठ मार्गगामी हैं. हम सुख और कल्याण के लिए उसी प्रकार आप की उपासना करते हैं, जिस प्रकार रथ की परिक्रमा की जाती है. (७)

EN English Translation

O Indra! You are good-minded. You are the satpati. You are the best guide. We worship you for happiness and welfare in the same way as the chariot is circumambulated. (7)

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