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सामवेद

Chapter / Prapathak 26 • Dashati / Sukta 2 • Mantra 4

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 26 • दशती / सूक्त 2 • मन्त्र 4

26.2.4

Mantra ID: 26.2.4

शाक्मना शाको अरुणः सुपर्ण आ यो महः शूरः सनादनीडः । यच्चिकेत सत्यमित्तन्न मोघं वसु स्पार्हमुत जेतोत दाता ॥ (४)

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सामवेद मन्त्र 26.2.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! आप दृढ़मन, सर्वशक्तिमान व सुपर्ण पक्षी के समान हैं. आप जो ठान लेते हैं, वही करते हैं. आप शक्तिपूर्वक जो वैभव प्राप्त करते हैं, उसे अपने उपासकों को दे देते हैं. (४)

EN English Translation

O Indra! You are like a strong, omnipotent and beautiful bird. You do what you decide. You give the glory you get powerfully to your worshippers. (4)

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