Popular:
सामवेद

Chapter / Prapathak 26 • Dashati / Sukta 2 • Mantra 8

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 26 • दशती / सूक्त 2 • मन्त्र 8

26.2.8

Mantra ID: 26.2.8

उतो न्वस्य जोषमा इन्द्रः सुतस्य गोमतः । प्रातर्होतेव मत्सति ॥ (८)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

सामवेद मन्त्र 26.2.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! प्रातः जैसे होता यज्ञ में उपासना करने की इच्छा रखते हैं, वैसे ही आप प्रातः सोमरस को पीने की इच्छा रखते हैं. वह परिष्कृत और गाय के दूध में मिला हुआ रहता है. (८)

EN English Translation

O Indra! As you wish to worship in the morning, you wish to drink Someras in the morning. It is refined and mixed with cow's milk. (8)

卐 HinduText AI