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सामवेद

Chapter / Prapathak 26 • Dashati / Sukta 3 • Mantra 10

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 26 • दशती / सूक्त 3 • मन्त्र 10

26.3.10

Mantra ID: 26.3.10

न ते गिरो अपि मृष्ये तुरस्य न सुष्टुतिमसुर्यस्य विद्वान् । सदा ते नाम स्वयशो विवक्मि ॥ (१०)

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सामवेद मन्त्र 26.3.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! हम आप का नाम (यश) बढ़ाने वाली प्रार्थनाएं करते हैं (स्तोत्र गाते हैं). आप विद्वान्‌ हैं. आप की शूरवीरता को हम जानते हैं. हम आप की उपासना करना नहीं छोड़ सकते. (१०)

EN English Translation

O Indra! We pray to enhance your name (fame) (sing hymns). You are a scholar. We know your bravery. We can't stop worshiping you. (10)

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