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सामवेद

Chapter / Prapathak 26 • Dashati / Sukta 3 • Mantra 8

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 26 • दशती / सूक्त 3 • मन्त्र 8

26.3.8

Mantra ID: 26.3.8

शिक्षेयमिन्महयते दिवेदिवे राय आ कुहचिद्विदे । न हि त्वदन्यन्मघवन्न आप्यं वस्यो अस्ति पिता च न ॥ (८)

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सामवेद मन्त्र 26.3.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! हम कहीं भी रहें पर आप के लिए यज्ञ करने के लिए समय व धन निकालते हैं. आप के अलावा हमारा कोई घनिष्ठ नहीं है, कोई पिता के समान सहायक भी (पालक) नहीं है. (८)

EN English Translation

O Indra! Wherever we live, we take out time and money to perform yagna for you. Apart from you, we have no close, no father-like assistant (foster). (8)

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