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26.4.3
वि षु विश्वा अरातयोऽर्यो नशन्त नो धियः । अस्तासि शत्रवे वधं यो न इन्द्र जिघाँसति । या ते रातिर्ददिवसु नभन्तामन्यकेषां ज्याका अधि धन्वसु ॥ (३)
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सामवेद मन्त्र 26.4.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे इंद्र! हम पर आक्रमण करने वाले को आप स्वयं अपने शस्त्रों से मार डालते हैं. हमारी बुद्धि को आप प्रेरणा दीजिए. आप हमें धनादि दान कीजिए. हमारी हार्दिक इच्छा है कि हमारे शत्रुओं के धनुष की प्रत्यंचा टूट जाए. (३)
EN English Translation
O Indra! You kill the one who attacks us with your own weapons. Inspire our intellect. You donate money to us. It is our heartfelt wish that the bow of our enemies should be broken. (3)