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सामवेद

Chapter / Prapathak 26 • Dashati / Sukta 4 • Mantra 8

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 26 • दशती / सूक्त 4 • मन्त्र 8

26.4.8

Mantra ID: 26.4.8

अत्रा वि नेमिरेषामुरां न धूनुते वृकः । दिवो अमुष्य शासतो दिवं यय दिवावसो ॥ (८)

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सामवेद मन्त्र 26.4.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! सोम को कूटने वाले पत्थर भी मानो बोलते हुए आप को बुला रहे हैं. हे स्वर्गलोकवासी! हम आप के राज में सुखी हैं. (८)

EN English Translation

O Indra! The stones that crush Som are also calling you while speaking. O inhabitants of heaven! We are happy under your rule. (8)

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