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सामवेद

Chapter / Prapathak 26 • Dashati / Sukta 6 • Mantra 5

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 26 • दशती / सूक्त 6 • मन्त्र 5

26.6.5

Mantra ID: 26.6.5

यो जागार तमृचः कामयन्ते यो जागार तमु सामानि यन्ति । यो जागार तमयँ सोम आह तवाहमस्मि सख्ये न्योकाः ॥ (५)

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सामवेद मन्त्र 26.6.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जो जाग्रत हैं, ऋचाएं उन की कामना करती हैं. जो जाग्रत हैं, उन्हें ही सोम प्राप्त होते हैं. जो जाग्रत हैं, उन्हीं से सोम कहते हैं कि मैं तुम्हारा मित्र हूं. (५)

EN English Translation

Those who are awake, riches wish for them. Only those who are awake receive soma. Som says to those who are awake that I am your friend. (5)

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