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सामवेद

Chapter / Prapathak 26 • Dashati / Sukta 7 • Mantra 10

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 26 • दशती / सूक्त 7 • मन्त्र 10

26.7.10

Mantra ID: 26.7.10

अभि वाजी विश्वरूपो जनित्रँ हिरण्ययं बिभ्रदत्कँ सुपर्णः । सूर्यस्य भानुमृतुथा वसानः परि स्वयं मेधमृज्रो जजान ॥ (१०)

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सामवेद मन्त्र 26.7.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! आप विश्वरूप व सुपर्ण (गरुड़) जैसे वेगवान हैं. आप उत्पत्ति स्थान (यज्ञवेदी) को सोने सा चमका देते हैं. आप ऋतु के अनुकूल सूर्य व मेघ को धारण करते हैं. (१०)

EN English Translation

O agni! You are as fast as Vishwaroop and Suparna (Garuda). You make the place of origin (yajnavedi) shine like gold. You wear the sun and cloud according to the season. (10)

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