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सामवेद

Chapter / Prapathak 26 • Dashati / Sukta 7 • Mantra 12

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 26 • दशती / सूक्त 7 • मन्त्र 12

26.7.12

Mantra ID: 26.7.12

अयँ सहस्रा परि युक्ता वसानः सूर्यस्य भानुं यज्ञो दाधार । सहस्रदाः शतदा भूरिदावा धर्त्ता दिवो भुवनस्य विश्पतिः ॥ (१२)

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सामवेद मन्त्र 26.7.12 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे यजमानो! अग्नि हजारों किरणों वाले सूर्य के तेज को धारण करते हैं. वे यज्ञ का मूल आधार है. वे स्वर्गलोक व पृथ्वीलोक को धारण करते हैं. वे सैकड़ोंहजारों प्रकार के ऐश्वर्यदाता व विश्वपति हैं. (१२)

EN English Translation

O hosts! Agni holds the brightness of the sun with thousands of rays. They are the basic basis of yajna. They hold heaven and earth. He is a hundreds of thousands of types of opulence and vishwapati. (12)

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