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सामवेद

Chapter / Prapathak 27 • Dashati / Sukta 1 • Mantra 14

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 27 • दशती / सूक्त 1 • मन्त्र 14

27.1.14

Mantra ID: 27.1.14

प्रेता जयता नर इन्द्रो वः शर्म यच्छतु । उग्रा वः सन्तु बाहवोऽनाधृष्या यथासथ ॥ (१४)

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सामवेद मन्त्र 27.1.14 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे वीर मनुष्यो! इंद्र आप को सुखशांतिमय बनाने की कृपा करें. आप के बाहु उग्र हों. आप को श्रु अधीन न बना सके. आप उन पर आक्रमण कर के विजय प्राप्त कीजिए. (१४)

EN English Translation

O brave men! Indra, please make you happy. Your arms are furious. You can't be made subject to shrew. You attack them and win. (14)

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