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सामवेद

Chapter / Prapathak 3 • Dashati / Sukta 1 • Mantra 3

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 3 • दशती / सूक्त 1 • मन्त्र 3

3.1.3

Mantra ID: 3.1.3

अभि प्र वः सुराधसमिन्द्रमर्च यथा विदे । यो जरितृभ्यो मघवा पुरूवसुः सहस्रेणेव शिक्षति ॥ (३)

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सामवेद मन्त्र 3.1.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे यजमानो! इंद्र पशु आदि बहुत प्रकार के धन वाले हैं. वे अपनी स्तुति करने वाले को बहुविध धन देते हैं. आप श्रेष्ठ धन देने वाले इंद्र की हर प्रकार से पूजाअर्चना करें. (३)

EN English Translation

O hosts! Indra animals etc. have many types of wealth. They give a lot of money to those who praise them. You should worship Indra, who gives the best wealth, in every way. (3)

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