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सामवेद

Chapter / Prapathak 5 • Dashati / Sukta 1 • Mantra 1

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 5 • दशती / सूक्त 1 • मन्त्र 1

5.1.1

Mantra ID: 5.1.1

उच्चा ते जातमन्धसो दिवि सद्भूम्या ददे । उग्रँ शर्म महि श्रवः ॥ (१)

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सामवेद मन्त्र 5.1.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! स्वर्गलोक में आप के पोषक रस॒ का जन्म हुआ है. उसी स्वर्गलोक से आप महत्त्वपूर्ण सुख और प्रचुर अन्न पृथ्वी पर पहुंचाते हैं. (१)

EN English Translation

O Mon! Your nourishing juices have been born in heaven. From the same heaven, you deliver important happiness and abundant food to the earth. (1)

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