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सामवेद

Chapter / Prapathak 7 • Dashati / Sukta 3 • Mantra 5

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 7 • दशती / सूक्त 3 • मन्त्र 5

7.3.5

Mantra ID: 7.3.5

दुहान ऊधर्दिव्यं मधु प्रियं प्रत्नँ सधस्थमासदत् । आपृच्छ्यं धरुणं वाज्यर्षसि नृभिर्धौतो विचक्षणः ॥ (५)

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सामवेद मन्त्र 7.3.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

यजमानों ने सोमरस छाना है. यह मधुर और आनंददायी है. यह अपने प्राचीन स्थान पर पहुंचता है. हे सोम! आप खास निरीक्षण करने वाले हैं. जो यजमान अच्छा यज्ञ करने की भावना रखते हैं, आप उस यजमान पर अपनी कृपा दृष्टि रखते हैं. (५)

EN English Translation

The hosts have filtered someras. It is sweet and enjoyable. It reaches its ancient place. O Mon! You are going to do a special inspection. The host who has the feeling of performing a good yajna, you keep your grace on that host. (5)

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