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सामवेद

Chapter / Prapathak 8 • Dashati / Sukta 3 • Mantra 10

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 8 • दशती / सूक्त 3 • मन्त्र 10

8.3.10

Mantra ID: 8.3.10

इन्द्र सुतेषु सोमेषु क्रतुं पुनीष उक्थ्यम् । विदे वृधस्य दक्षस्य महाँ हि षः ॥ (१०)

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सामवेद मन्त्र 8.3.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! आप के पुत्र आप के लिए सोमरस परिष्कृत करते हैं. आप महान हैं. आप उन के यज्ञों तथा उन के स्तोत्रों की बढ़ोतरी करते हैं. (१०)

EN English Translation

O Indra! The sons of you refine somerus for you. You are great. You increase their sacrifices and their hymns. (10)

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