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सामवेद

Chapter / Prapathak 8 • Dashati / Sukta 5 • Mantra 1

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 8 • दशती / सूक्त 5 • मन्त्र 1

8.5.1

Mantra ID: 8.5.1

अस्य प्रत्नामनु द्युतँ शुक्रं दुदुह्रे अह्रयः । पयः सहस्रसामृषिम् ॥ (१)

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सामवेद मन्त्र 8.5.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सोमरस चमकीला, ज्ञान बढ़ाने वाला व मनोकामना पूरी करने वाला है. ऋषियों ने इस के सहस्र स्वरूप का स्मरण कर के इसे तैयार किया है. (१)

EN English Translation

Someras is bright, knowledge-enhancing and fulfilling desires. The sages have prepared it by remembering its sahasra form. (1)

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