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सामवेद

Chapter / Prapathak 8 • Dashati / Sukta 5 • Mantra 4

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 8 • दशती / सूक्त 5 • मन्त्र 4

8.5.4

Mantra ID: 8.5.4

एष प्रत्नेन जन्मना देवो देवेभ्यः सुतः । हरिः पवित्रे अर्षति ॥ (४)

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सामवेद मन्त्र 8.5.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सोमरस दिव्य है. देवता संस्कारपूर्वक उसे परिष्कृत करते हैं. वह हरा है और उसे पवित्र छलनी में परिष्कृत किया जाता है. (४)

EN English Translation

Somerus is divine. The gods refine it sacramentally. He is green and is refined into holy sieves. (4)

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