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Katha Upanishad (Kathopanishad) 1.10
शान्तसंकल्पः सुमना यथा स्या- द्वीतमन्युर्गौतमो माभि मृत्यो। त्वत्प्रसृष्टं माभिवदेत्प्रतीत एतत्त्रयाणां प्रथमं वरं वृणे॥ १०॥
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उपनिषद मन्त्र संख्या 10 का आध्यात्मिक रहस्य