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कठोपनिषद् • वल्ली 3, मन्त्र 16

Katha Upanishad (Kathopanishad) • कृष्ण यजुर्वेद (Krishna Yajurveda - Katha Shakha)

कठोपनिषद् • वल्ली 3 • मन्त्र 16
प्रस्तुत विज्ञानकी महिमा

Katha Upanishad (Kathopanishad) 3.16

Mantra: 3.16 [Kathopanishad_3.16]

नाचिकेतमुपाख्यानं मृत्युप्रोक्तं सनातनम्। उक्त्वा श्रुत्वा च मेधावी ब्रह्मलोके महीयते॥ १६॥

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उपनिषद मन्त्र संख्या 16 का आध्यात्मिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

नचिकेताद्वारा प्राप्त तथा मृत्युके कहे हुए इस सनातन विज्ञानको कह और सुनकर बुद्धिमान् पुरुष ब्रह्मलोकमें महिमान्वित होता है॥ १६॥

भा शाङ्करभाष्य एवं विस्तृत व्याख्या (Shankaracharya Bhashya & Commentary)

【शाङ्करभाष्यम्】 नाचिकेतं नचिकेतसा प्राप्तं नाचिकेतं मृत्युना प्रोक्तं मृत्युप्रोक्तमिदमाख्यानमुपाख्यानं वल्लीत्रयलक्षणं सनातनं चिरन्तनं वैदिकत्वादुक्त्वा ब्राह्मणेभ्यः श्रुत्वाचार्येभ्यो मेधावी ब्रह्मैव लोको 【भाष्यार्थ】 नचिकेताद्वारा प्राप्त किये तथा मृत्युके कहे हुए इस तीन वल्लियोंवाले उपाख्यानको, जो वैदिक होनेके कारण सनातन—चिरन्तन है, ब्राह्मणोंसे कहकर तथा आचार्योंसे सुनकर मेधावी पुरुष ब्रह्मलोकमें—ब्रह्म ही लोक है; उसमें महिमान्वित होता है अर्थात् सबका 【शाङ्करभाष्यम्】 ब्रह्मलोकस्तस्मिन्महीयत आत्मभूत उपास्यो भवतीत्यर्थः ॥ १६ ॥ 【भाष्यार्थ】 आत्मस्वरूप होकर उपासनीय होता है ॥ १६ ॥
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