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केनोपनिषद् • खण्ड 1, मन्त्र 3

Kena Upanishad • सामवेद (Samaveda - Talavakara Brahmana)

केनोपनिषद् • खण्ड 1 • मन्त्र 3

Kena Upanishad 1.3

Mantra: 1.3 [Kenopanishad_1.3]

न तत्र चक्षुर्गच्छति न वाग्गच्छति नो मनः । न विद्मो न विजानीमो यथैतदनुशिष्यात् अन्यदेव तद्विदितादथो अविदितादधि । इति शुश्रुम पूर्वेषां ये नस्तद्व्याचचक्षिरे ॥ ३॥

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उपनिषद मन्त्र संख्या 3 का आध्यात्मिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

वहाँ उस ब्रह्म तक न आँखें पहुँचती हैं, न वाणी पहुँचती है, न मन पहुँचता है, अतः जिस प्रकार उसका इस ब्रह्म का उपदेश करना चाहिए वह न हम जानते हैं, न ही यह समझते हैं कि इस दशा में किस प्रकार कोई इसका उपदेश करे क्योंकि वह ब्रह्म जानने योग्य विषय से भिन्न है तथा अज्ञात से भी परे है – ऐसा हमने अपने पूर्वजों से सुना है। ॥३॥
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