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केनोपनिषद् • खण्ड 3, मन्त्र 11

Kena Upanishad • सामवेद (Samaveda - Talavakara Brahmana)

केनोपनिषद् • खण्ड 3 • मन्त्र 11

Kena Upanishad 3.11

Mantra: 3.11 [Kenopanishad_3.11]

अथेन्द्रमब्रुवन्मघवन्नेतद्विजानीहि किमेतद्यक्षमिति तथेति तदभ्यद्रवत्तस्मात्तिरोदधे ॥ ११॥

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उपनिषद मन्त्र संख्या 11 का आध्यात्मिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

समस्त देवताओं ने तब इन्द्र से प्रार्थना कि - हे मघवन् ! देखो तो सही यह यक्ष कौन है-इन्द्र ने कहा बहुत अच्छा। वह दौड़ कर उस यक्षरूपी ब्रह्म के पास गए, परन्तु वह इंद्र के सामने से अंतर्ध्यान हो गए। ॥११॥
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