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Kena Upanishad 4.3
तस्माद्वा इन्द्रोऽतितरामिवान्यान्देवान्स ह्येनन्नेदिष्ठं पस्पर्श स ह्येनत्प्रथमो विदाञ्चकार ब्रह्मेति ॥ ३॥
HinduText AI से इस उपनिषद मन्त्र का ब्रह्मज्ञान समझें
उपनिषद मन्त्र संख्या 3 का आध्यात्मिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
इसीलिये समस्त देवताओं मे इन्द्र ही सब से बढ़ कर हैं। क्योंकि उन्ही ने ब्रह्म का समीपस्थ्य प्राप्त कर सर्वप्रथम ब्रह्मविद्या रुपी उमा से ब्रह्म के विषय मे जाना। आध्यात्मिक पक्ष मे - इन्द्रियों में आत्मा ही सब से बड़ा देव है क्योंकि इसी ने बुद्धि के द्वारा सब से पहले ब्रह्म स्वरुप का साक्षात्कार किया। अधिदैवत पक्ष में - सूर्य ही सब भौतिक देवों में बड़ा देव है क्योंकि मनुष्य की सारी बुद्धि उसको न जान कर अन्त में यही विचार करती है कि इसका रचयिता अवश्य कोई अनन्त शक्तिमय प्रभु है। ॥३॥