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केनोपनिषद् • खण्ड 4, मन्त्र 5

Kena Upanishad • सामवेद (Samaveda - Talavakara Brahmana)

केनोपनिषद् • खण्ड 4 • मन्त्र 5

Kena Upanishad 4.5

Mantra: 4.5 [Kenopanishad_4.5]

अथाध्यात्मं यद्धेतद्गच्छतीव च मनोऽनेन चैतदुपस्मरत्यभीक्ष्णं सङ्कल्पः ॥५॥

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उपनिषद मन्त्र संख्या 5 का आध्यात्मिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

अध्यात्म पक्ष यह है कि यह मन जो चलता हुआ सा कहा जाता है, वही ब्रह्म है। इसलिए मन से बार बार लगातार उसी ब्रह्म का स्मरण करना चाहिए और उसी का सङ्कल्प करना चाहिए। ॥५॥
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