Popular:
यजुर्वेद

Adhyaya 11 • Mantra 64

Yajurveda (यजुर्वेद)

यजुर्वेद • अध्याय 11 • मन्त्र 64

11.64

Mantra ID: 11.64

उ॒त्थाय॑ बृह॒ती भ॒वोदु॑ तिष्ठ ध्रु॒वा त्वम् । मित्रै॒तां त॑ऽउ॒खां परि॑ ददा॒म्यभि॑त्याऽए॒षा मा भे॑दि ॥ (६४)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

यजुर्वेद मन्त्र 11.64 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे उखे! आप गर्त से निकल कर बड़े हों. आप स्थायी हो कर काम करें. हे मित्र देव! हम इस पवित्र बरतन को नष्ट होने के डर से आप को संपते हैं. यह टूटे नहीं. यह अच्छी तरह से कार्य करे. (६४)

EN English Translation

Oh my god! You grow up out of the trough. You work permanently. O friend God! We associate with you for fear of destroying this holy vessel. It's not broken. It works well. (64)

卐 HinduText AI