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यजुर्वेद

Adhyaya 12 • Mantra 108

Yajurveda (यजुर्वेद)

यजुर्वेद • अध्याय 12 • मन्त्र 108

12.108

Mantra ID: 12.108

ऊर्जो॑ नपाज्जातवेदः सुश॒स्तिभि॒र्मन्द॑स्व धी॒तिभि॑र्हि॒तः । त्वेऽइषः॒ संद॑धु॒र्भूरि॑वर्पसश्चि॒त्रोत॑यो वा॒मजा॑ताः ॥ (१०८)

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यजुर्वेद मन्त्र 12.108 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! आप ऊर्जस्वी, सर्वज्ञ हैं. हम अच्छी प्रशंसा से आप को आनंदित करते हैं. आप सब का हित धारिए. यजमान रक्षा साधनों से सुरक्षित और श्रेष्ठ कुल में जन्म लेने बाले हैं. वे आप को अन्नमयी आहुति भेंट करते हैं. (१०८)

EN English Translation

O agni! You are energetic, omniscient. We delight you with good appreciation. Serve the interest of all of you. The host is born in a safe and superior family by defense means. They offer you annamayi sacrifice. (108)

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