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यजुर्वेद

Adhyaya 12 • Mantra 116

Yajurveda (यजुर्वेद)

यजुर्वेद • अध्याय 12 • मन्त्र 116

12.116

Mantra ID: 12.116

तुभ्यं॒ ताऽअ॑ङ्गिरस्तम॒ विश्वाः॑ सुक्षि॒तयः॒ पृथ॑क् । अग्ने॒ कामा॑य येमिरे ॥ (११६)

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यजुर्वेद मन्त्र 12.116 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! आप श्रेष्ठ अंगों वाले हैं. आप के प्रति पृथ्वी की श्रेष्ठ प्रार्थनाएं अलग से समर्पित की जाती हैं. हम अपनी कामनाओं की पूर्ति के लिए आप की उपासना करते हैं. (११६)

EN English Translation

O agni! You are the best limbs. The best prayers of the earth towards you are dedicated separately. We worship you to fulfill our wishes. (116)

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