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यजुर्वेद

Adhyaya 12 • Mantra 25

Yajurveda (यजुर्वेद)

यजुर्वेद • अध्याय 12 • मन्त्र 25

12.25

Mantra ID: 12.25

दृ॒शा॒नो रु॒क्मऽउ॒र्व्या व्य॑द्यौद् दु॒र्मर्ष॒मायुः॑ श्रि॒ये रु॑चा॒नः । अ॒ग्निर॒मृतो॑ऽअभव॒द् वयो॑भि॒र्यदे॑नं॒ द्यौरज॑नयत् सु॒रेताः॑ ॥ (२५)

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यजुर्वेद मन्त्र 12.25 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

अग्नि दर्शनीय हैं व रुक्म जैसी आभावाले हैं. अग्नि अपनी आभा से पृथ्वी पर शोभित होते हैं. चमकते हैं. अमर हैं. श्रेष्ठ वीर्य बाले हैं. वे पृथ्वी और स्वर्ग दोनों लोकों के बीच शोभायमान हैं. (२५)

EN English Translation

Fire is visible and has a rukm-like aura. Fire adorns the earth with its aura. shine. are immortal. They are the best semen. He is adorned among both earth and heaven. (25)

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