Popular:
यजुर्वेद

Adhyaya 12 • Mantra 43

Yajurveda (यजुर्वेद)

यजुर्वेद • अध्याय 12 • मन्त्र 43

12.43

Mantra ID: 12.43

स बो॑धि सू॒रिर्म॒घवा॒ वसु॑पते॒ वसु॑दावन् । यु॒यो॒ध्यस्मद् द्वेषा॑सि वि॒श्वक॑र्मणे॒ स्वाहा॑ ॥ (४३)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

यजुर्वेद मन्त्र 12.43 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! आप धन के स्वामी और धनदाता हैं. आप हमारे द्वेषियों को दूर करने की कृपा कीजिए. सर्वकर्मा अग्नि के लिए स्वाहा. (४३)

EN English Translation

O agni! You are the master and wealth giver of wealth. Please remove our malice. Swaha for the agni of all karma. (43)

卐 HinduText AI