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यजुर्वेद

Adhyaya 12 • Mantra 55

Yajurveda (यजुर्वेद)

यजुर्वेद • अध्याय 12 • मन्त्र 55

12.55

Mantra ID: 12.55

ताऽअ॑स्य॒ सूद॑दोहसः॒ सोम॑ꣳ श्रीणन्ति॒ पृश्न॑यः । जन्म॑न् दे॒वानां॒ विश॑स्त्रि॒ष्वा रो॑च॒ने दि॒वः ॥ (५५)

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यजुर्वेद मन्त्र 12.55 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

स्वर्गलोक से जो जल मिलता है, उस से सोम शोभा पाते हैं. देवों के जन्मजन्म और प्रत्येक यज्ञ में यह सोम इस स्वर्गिक जल से परिपक्व होता है. (५५)

EN English Translation

Soma gets beauty from the water that he receives from heaven. In the birth of the gods and in every yajna, this Soma matures with this heavenly water. (55)

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