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यजुर्वेद

Adhyaya 13 • Mantra 21

Yajurveda (यजुर्वेद)

यजुर्वेद • अध्याय 13 • मन्त्र 21

13.21

Mantra ID: 13.21

या श॒तेन॑ प्रत॒नोषि॑ स॒हस्रे॑ण वि॒रोह॑सि । तस्या॑स्ते देवीष्टके वि॒धेम॑ ह॒विषा॑ व॒यम् ॥ (२१)

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यजुर्वेद मन्त्र 13.21 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे दूर्वा! हम आप के लिए वैसी ही हवि का विधान करते हैं, जिस से आप सैकड़ों हजारों की संख्या में उग कर बढ़ें. (२१)

EN English Translation

O Durva! We make the same desire for you, so that you grow in hundreds of thousands. (21)

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