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17.47
अ॒सौ या सेना॑ मरुतः॒ परे॑षाम॒भ्यैति॑ न॒ऽओज॑सा॒ स्पर्द्ध॑माना । तां गू॑हत॒ तम॒साप॑व्रतेन॒ यथा॒मीऽअ॒न्योऽअ॒न्यन्न जा॒नन् ॥ (४७)
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यजुर्वेद मन्त्र 17.47 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
मरुतो की सेना हमारे वेग के साथ स्पर्द्धा करने वाले शत्रुओं तक पहुंचे, ताकि भ्रम हो जाने के कारण एक दूसरे को जानने में ही असमर्थ हो जाएं तथा अपने ही "लोगों का नाश कर दें. (४७)
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