Popular:
यजुर्वेद

Adhyaya 17 • Mantra 64

Yajurveda (यजुर्वेद)

यजुर्वेद • अध्याय 17 • मन्त्र 64

17.64

Mantra ID: 17.64

उ॒द्ग्रा॒भं च॑ निग्रा॒भं च॒ ब्रह्म॑ दे॒वाऽअ॑वीवृधन् । अधा॑ स॒पत्ना॑निन्द्रा॒ग्नी मे॑ विषू॒चीना॒न् व्यस्यताम् ॥ (६४)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

यजुर्वेद मन्त्र 17.64 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र देव! हे अग्नि! आप ब्रह्मज्ञान की बढ़ोतरी कीजिए. आप श्रेष्ठ कर्म करने वालों का उच्च मार्ग प्रशस्त कीजिए. आप हमारे शत्रुओं का सर्वनाश कीजिए. (६४)

EN English Translation

O Lord Indra! O agni! Increase the knowledge of Brahman. Pave the way for those who do the best deeds. You destroy our enemies. (64)

卐 HinduText AI