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यजुर्वेद

Adhyaya 18 • Mantra 64

Yajurveda (यजुर्वेद)

यजुर्वेद • अध्याय 18 • मन्त्र 64

18.64

Mantra ID: 18.64

यद्द॒त्तं यत्प॑रा॒दानं॒ यत्पू॒र्त्तं याश्च॒ दक्षि॑णाः । तद॒ग्निर्वै॑श्वकर्म॒णः स्व॑र्दे॒वेषु॑ नो दधत् ॥ (६४)

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यजुर्वेद मन्त्र 18.64 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हम ने जो कुछ दूसरों को दान किया है, हम ने जो कुछ प्रतिपूर्ति की है, हम ने जो कुछ दक्षिणा दी है, उसे विश्वकर्मां अग्नि देवताओं के लिए धारने की कृपा करें. (६४)

EN English Translation

Whatever we have donated to others, whatever we have reimbursed, whatever dakshina we have given, please hold it for vishwakarma agni gods. (64)

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