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यजुर्वेद

Adhyaya 2 • Mantra 17

Yajurveda (यजुर्वेद)

यजुर्वेद • अध्याय 2 • मन्त्र 17

2.17

Mantra ID: 2.17

य प॑रि॒धिं प॒र्य्यध॑त्था॒ऽअग्ने॑ देवप॒णिभि॑र्गु॒ह्यमा॑नः । तं त॑ऽए॒तमनु॒ जोषं॑ भराम्ये॒ष मेत्त्वद॑पचे॒तया॑ताऽअ॒ग्नेः प्रि॒यं पाथो॑ऽपी॑तम् ॥ (१७)

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यजुर्वेद मन्त्र 2.17 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! प्राणियों से बचाव के लिए आप के चारों ओर परिधि बनाई जाती है. वह परिधि आप के अनुरूप है. वह परिधि गुप्त है. अग्नि इस परिधि को भरनेपूरने की कृपा करें. अग्नि के लिए प्रिय पाथेय समर्पित किया गया है. वे उन्हें स्वीकार करने की कृपा करें. (१७)

EN English Translation

O agni! Perimeter is built around you to protect yourself from animals. That perimeter suits you. That perimeter is secret. May the agni fill this circumference. The beloved pathehas been dedicated to agni. Please accept them. (17)

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