Popular:
यजुर्वेद

Adhyaya 2 • Mantra 30

Yajurveda (यजुर्वेद)

यजुर्वेद • अध्याय 2 • मन्त्र 30

2.30

Mantra ID: 2.30

ये रू॒पाणि॑ प्रतिमु॒ञ्चमा॑ना॒ऽअसु॑राः॒ सन्तः॑ स्व॒धया॒ चर॑न्ति । प॒रा॒पुरो॑ नि॒पुरो॒ ये भर॑न्त्य॒ग्निष्टाँल्लो॒कात् प्रणु॑दात्य॒स्मात् ॥ (३०)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

यजुर्वेद मन्त्र 2.30 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जो असुर रूप बदल कर या अन्य रूप में आ कर पितरों के लिए अर्पित आहुति को खा जाते हैं, आप इस तरह अपना भरणपोषण करने वाले नीच कार्य करने वाले राक्षसों को लोक से दूर करने की कृपा कीजिए. (३०)

EN English Translation

Those who change the asura form or come in other forms and eat the sacrifices offered to the ancestors, please remove the lowly working demons who feed themselves in this way from the world. (30)

卐 HinduText AI