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यजुर्वेद

Adhyaya 23 • Mantra 32

Yajurveda (यजुर्वेद)

यजुर्वेद • अध्याय 23 • मन्त्र 32

23.32

Mantra ID: 23.32

द॒धि॒क्राव्णो॑ऽअकारिषं जि॒ष्णोरश्व॑स्य वा॒जिनः॑ । सु॒र॒भि नो॒ मुखा॑ कर॒त्प्र ण॒ऽआयू॑षि तारिषत् ॥ (३२)

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यजुर्वेद मन्त्र 23.32 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हम शक्तिशाली यज्ञ की अग्नि को विधिविधानपूर्वक संस्कार युक्त बनाते हैं. यज्ञ देव की कृपा हमारे मुखों को सुगंधमय व हमें आयुष्मान बनाए. यज्ञ देव की कृपा हमारा तारण करें. (३२)

EN English Translation

We make the agni of the powerful yajna lawfully cultured. The grace of Yajna Dev makes our faces fragrant and ayushman us. Please please the Yagya Dev. (32)

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