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यजुर्वेद

Adhyaya 23 • Mantra 42

Yajurveda (यजुर्वेद)

यजुर्वेद • अध्याय 23 • मन्त्र 42

23.42

Mantra ID: 23.42

दैव्या॑ऽअध्व॒र्यव॒स्त्वाच्छ्य॑न्तु॒ वि च॑ शासतु । गात्रा॑णि पर्व॒शस्ते॒ सिमाः॑ कृण्वन्तु॒ शम्य॑न्तीः ॥ (४२)

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यजुर्वेद मन्त्र 23.42 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इस यज्ञ के अध्वर्यु (पुरोहित) आप के दोषों का क्षय करें व आप के अनुशासन हेतु मार्गदर्शन करें. इस यज्ञ के अध्वर्यु आप के शरीर उस के जोड़ों को शक्तिमान बनाने की कृपा करें. (४२)

EN English Translation

The adhwaryu (priest) of this yajna should reduce your defects and guide you for your discipline. Please make your body and your joints powerful. (42)

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