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यजुर्वेद

Adhyaya 27 • Mantra 25

Yajurveda (यजुर्वेद)

यजुर्वेद • अध्याय 27 • मन्त्र 25

27.25

Mantra ID: 27.25

आपो॑ ह॒ यद् बृ॑ह॒तीर्विश्व॒माय॒न् गर्भं॒ दधा॑ना ज॒नय॑न्तीर॒ग्निम् । ततो॑ दे॒वाना॒ सम॑वर्त्त॒तासु॒रेकः॒ कस्मै॑ दे॒वाय॑ ह॒विषा॑ विधेम ॥ (२५)

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यजुर्वेद मन्त्र 27.25 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जल अपार है. विश्‍व को अपने में समाए हुए है. अग्नि को गर्भ में धारण करता है. उस से देवताओं की उत्पत्ति हुई. उन के अलावा हम अब किस देवता के लिए हवि का विधान करें ? (२५)

EN English Translation

The water is immense. The world is contained in itself. He holds agni in the womb. From that the gods originated. Apart from them, for which god should we now make a law? (25)

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