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यजुर्वेद

Adhyaya 28 • Mantra 15

Yajurveda (यजुर्वेद)

यजुर्वेद • अध्याय 28 • मन्त्र 15

28.15

Mantra ID: 28.15

दे॒वी जोष्ट्री॒ वसु॑धिती दे॒वमिन्द्र॑मवर्धताम् । अया॑व्य॒न्याघा द्वेषा॒स्यान्या व॑क्ष॒द्वसु॒ वार्या॑णि॒ यज॑मानाय शिक्षि॒ते व॑सु॒वने॑ व॑सु॒धेय॑स्य वीतां॒ यज॑ ॥ (१५)

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यजुर्वेद मन्त्र 28.15 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

देवी जोशीली, धन धारण करने वाली, इंद्र देव की बढ़ोतरी करने वाली, द्वेषों व पापों को दूर करने वाली हैं. यजमान के लिए धन धारने की कृपा कीजिए. यजमान को धन प्राप्ति की शिक्षा दीजिए. यजमान इस सब के लिए यज्ञ करें. (१५)

EN English Translation

The goddess is passionate, wealth-rich, the one who increases Indra Dev, removes hatreds and sins. Please hold money for the host. Teach the host to get money. The host should perform yajna for all this. (15)

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