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यजुर्वेद

Adhyaya 29 • Mantra 23

Yajurveda (यजुर्वेद)

यजुर्वेद • अध्याय 29 • मन्त्र 23

29.23

Mantra ID: 29.23

उप॒ प्रागा॒च्छस॑नं वा॒ज्यर्वा॑ देव॒द्रीचा॒ मन॑सा॒ दीध्या॑नः । अ॒जः पु॒रो नी॑यते॒ नाभि॑र॒स्यानु॑ प॒श्चात् क॒वयो॑ यन्ति रे॒भाः ॥ (२३)

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यजुर्वेद मन्त्र 29.23 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अर्वन! हव्रि गतिशील है. मन की तरह तेजी से ऊपर की ओर जाती है. इस का धुआं आगे की ओर ले जाया जाता है. नाभि इस का अनुकरण करती है. पीछेपीछे पाठ करते हुए कविगण चलते हैं. (२३)

EN English Translation

O Arwan! Eve is dynamic. The mind moves upwards as fast as it is. The smoke of this is taken forward. The navel imitates this. The poets walk back and forth while reciting. (23)

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