Popular:
यजुर्वेद

Adhyaya 29 • Mantra 29

Yajurveda (यजुर्वेद)

यजुर्वेद • अध्याय 29 • मन्त्र 29

29.29

Mantra ID: 29.29

प्रा॒चीनं॑ ब॒र्हिः प्र॒दिशा॑ पृथि॒व्या वस्तो॑र॒स्या वृ॑ज्यते॒ऽअग्रे॒ऽअह्ना॑म् । व्यु॑ प्रथते वित॒रं वरी॑यो दे॒वेभ्यो॒ऽअदि॑तये स्यो॒नम् ॥ (२९)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

यजुर्वेद मन्त्र 29.29 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

ये कुशाएं प्राचीन हैं. पृथ्वी की प्रदिशाओं में फैली हुई हैं. अदिति देवता के बिराजमान होने के लिए इन कुशाओं को फैलाया (बिछाया) जाता है. कुशाएं बिछा कर सुख से बैठा जा सकता है. (२९)

EN English Translation

These kushas are ancient. Spread across the earth's rivers. These kushas are spread (laid) to be the birajman of Aditi Devta. You can sit happily by laying kushas. (29)

卐 HinduText AI