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यजुर्वेद

Adhyaya 3 • Mantra 6

Yajurveda (यजुर्वेद)

यजुर्वेद • अध्याय 3 • मन्त्र 6

3.6

Mantra ID: 3.6

आयं गौः पृश्नि॑रक्रमी॒दस॑दन् मा॒तरं॑ पु॒रः । पि॒तरं॑ च प्र॒यन्त्स्वः॑ ॥ (६)

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यजुर्वेद मन्त्र 3.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

अग्नि देव सर्वत्र भ्रमणशील व बहुरंगी लपटों वाले हैं. वह पृथ्वी माता के पास आसन पर विराजमान हैं. यज्ञ में वह प्रयलपूर्वक स्वर्गलोक पिता के पास पहुंच गए हैं. (६)

EN English Translation

Agni Dev is everywhere in a moving and multi-colored flames. He is sitting on a seat near Mother Earth. In the yajna, he has reached heavenly father. (6)

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