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यजुर्वेद

Adhyaya 33 • Mantra 11

Yajurveda (यजुर्वेद)

यजुर्वेद • अध्याय 33 • मन्त्र 11

33.11

Mantra ID: 33.11

आ यदि॒षे नृ॒पतिं॒ तेज॒ऽआन॒ट् शुचि॒ रेतो॒ निषि॑क्तं॒ द्यौर॒भीके॑ । अ॒ग्निः शर्द्ध॑मनव॒द्यं युवा॑नꣳस्वा॒ध्यं जनयत्सू॒दय॑च्च ॥ (११)

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यजुर्वेद मन्त्र 33.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जब अग्नि में अन्न और पवित्र जल से शुद्ध हवि से यजन किया जाता है, तब अग्नि जल से सींचते हैं. यह जल बलशाली बनाता है. यह सुखवर्द्धक, निरंतर प्रवाहित होने वाला, युवा बनाने वाला व जग के लिए उपजाऊ है. (११)

EN English Translation

When the agni is purified with food and holy water, then the agni is irrigated with water. It makes water strong. It is a pleasant, continuous flowing, youth-making and fertile for the world. (11)

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