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यजुर्वेद

Adhyaya 33 • Mantra 6

Yajurveda (यजुर्वेद)

यजुर्वेद • अध्याय 33 • मन्त्र 6

33.6

Mantra ID: 33.6

अ॒यमि॒ह प्र॑थ॒मो धा॑यि धा॒तृभि॒र्होता॒ यजि॑ष्ठोऽअध्व॒रेष्वीड्यः॑ । यमप्न॑वानो॒ भृग॑वो विरुरु॒चुर्वने॑षु चि॒त्रं वि॒भ्वं वि॒शेवि॑शे ॥ (६)

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यजुर्वेद मन्त्र 33.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

यह अग्नि अग्रगण्य हैं. यज्ञ में सर्वप्रथम इन्हीं का ध्यान किया जाता है. यह यजमानों के होता व यज्ञ में उपासनीय हैं. यज्ञों में विशेष रूप से इन्हें प्रतिष्ठित किया जाता है. इन अग्नि को अप्नवान, भृगु, विरुरुचु आदि ऋषियों ने वनों में बारबार प्रतिष्ठित किया है. (६)

EN English Translation

These agnis are leading. They are first meditated in the yajna. It is the worshiper of the hosts in the yagna. They are especially distinguished in yagyas. These agnis have been repeatedly established in the forests by sages like Apnavan, Bhrigu, Viruruchu etc. (6)

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