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यजुर्वेद

Adhyaya 34 • Mantra 32

Yajurveda (यजुर्वेद)

यजुर्वेद • अध्याय 34 • मन्त्र 32

34.32

Mantra ID: 34.32

आ रा॑त्रि॒ पार्थि॑व॒ꣳ रजः॑ पि॒तुर॑प्रायि॒ धाम॑भिः । दि॒वः सदा॑सि बृह॒ती वि ति॑ष्ठस॒ऽआ त्वे॒षं व॑र्त्तते॒ तमः॑ ॥ (३२)

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यजुर्वेद मन्त्र 34.32 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

रात्रि देवी पृथ्वीलोक को अंधकार से पूरा करती हैं. वे अंतरिक्षलोक को अंधकार से पूरा करती हैं और स्वर्ग को व्याप्त करती है. इस प्रकार रात्रि देवी सब को अंधकार से व्याप्त हैं. (३२)

EN English Translation

The night goddess completes the earth with darkness. They complete the space world with darkness and pervades heaven. In this way, the night goddess is pervading everyone with darkness. (32)

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