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यजुर्वेद

Adhyaya 7 • Mantra 44

Yajurveda (यजुर्वेद)

यजुर्वेद • अध्याय 7 • मन्त्र 44

7.44

Mantra ID: 7.44

अ॒यं नो॑ऽअ॒ग्निर्वरि॑वस्कृणोत्व॒यं मृधः॑ पु॒रऽए॑तु प्रभि॒न्दन् । अ॒यं वाजा॑ञ्जयतु॒ वाज॑साताव॒यꣳ शत्रू॑ञ्जयतु॒ जर्हृ॑षाणः॒ स्वाहा॑ ॥ (४४)

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यजुर्वेद मन्त्र 7.44 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! हमारे दुश्मनों का भेद दीजिए व उन को हरा दीजिए. हमारे दुश्मनों के नगर भेद दीजिए. हमारे दुश्मनों की जमा पूंजी हमें दे दीजिए. शत्रुओं को पराजित करने वाले अग्नि के लिए स्वाहा. (४४)

EN English Translation

O agni! Divide our enemies and defeat them. Divide the cities of our enemies. Give us the accumulated capital of our enemies. Swaha for agni that defeats enemies. (44)

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