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ऋग्वेद

Mandal 1 • Sukta 117 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 1 • सूक्त 117 • ऋचा / मन्त्र 8

1.117.8

Mantra ID: 1.117.8

यु॒वं श्यावा॑य॒ रुश॑तीमदत्तं म॒हः क्षो॒णस्या॑श्विना॒ कण्वा॑य । प्र॒वाच्यं॒ तद्वृ॑षणा कृ॒तं वां॒ यन्ना॑र्ष॒दाय॒ श्रवो॑ अ॒ध्यध॑त्तम् ॥ (८)

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ऋग्वेद मन्त्र 1.117.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अश्चिनीकुमारो! तुमने कोढ़ी श्याव ऋषि को उज्ज्वल त्वचा वाली स्त्री प्रदान की एवं दृष्टिरहित होने के कारण चलने में अशक्त कण्व को तेजपूर्ण नेत्र दिए. हे कामवर्षको! तुमने नृषद के बहरे पुत्र को कान प्रदान किए. तुम्हारे ये कार्य प्रशंसा के योग्य हैं. (८)

EN English Translation

O aschinikumaro! You gave the sage the leper-shy sage a woman with bright skin and gave a sharp eye to the hapless ear to walk due to being visually impaired. O work years! You gave ear to the deaf son of the nation. These actions of yours are worthy of praise. (8)

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