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ऋग्वेद

Mandal 1 • Sukta 117 • Mantra / Rik 9

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 1 • सूक्त 117 • ऋचा / मन्त्र 9

1.117.9

Mantra ID: 1.117.9

पु॒रू वर्पां॑स्यश्विना॒ दधा॑ना॒ नि पे॒दव॑ ऊहथुरा॒शुमश्व॑म् । स॒ह॒स्र॒सां वा॒जिन॒मप्र॑तीतमहि॒हनं॑ श्रव॒स्यं१॒॑ तरु॑त्रम् ॥ (९)

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ऋग्वेद मन्त्र 1.117.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे बहुरूपधारी अश्चिनीकुमारो! तुमने पेदु ऋषि को शीघ्रगामी सहस्र संख्या वाले धन का दाता, बलवान्‌, शत्रुओं द्वारा जीतने में अशक्य, शन्रुहंता, स्तुतिपात्र एवं रक्षक अश्व दिया था. (९)

EN English Translation

O polymorphic aschinikumaro! You gave the sage Pedu the giver of wealth, the giver of the fast-moving millennium, the power, the ashkya, the devil, the protector, and the protector of the enemies. (9)

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